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अब दुनिया मानेगी भारत की आदिवासी कला और शिल्प का लोहा

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय के सहयोग से, ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (TRIFED) दुनिया भर में 100 भारतीय मिशनों/दूतावासों में एक आत्मानिर्भर भारत कॉर्नर स्थापित करने जा रहा है। प्राकृतिक और जैविक उत्पादों के अलावा जीआई टैग वाली आदिवासी कला और शिल्प उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए यह कॉर्नर एक एक्सक्लूसिव स्पेस होगा। जनजातीय उत्पादों की समृद्धि और विविधता को प्रदर्शित करने वाले कैटलॉग और ब्रॉशर भी कॉर्नर में प्रदर्शित करने के लिए मिशनों और दूतावासों के साथ साझा किए गए हैं।

TRIFED “वोकल फॉर लोकल” पर फोकस के साथ “आत्मनिर्भर भारत” के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में जुटा है। इसके लिए वह संस्कृति मंत्रालय, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), वाणिज्य मंत्रालय,पर्यटन मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय जैसे कई मंत्रालयों और डाक विभाग के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहा है। इसके पीछे मकसद है कि जनजातीय उत्पादों के साथ-साथ जीआई टैग उत्पादों को बढ़ावा दिया जा सके और आदिवासी कारीगरों के सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में उन्हें एक ब्रांड में बदला जा सके।

भेजा जा रहा है पहला सेट
जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, जिन मिशनों और दूतावासों से संपर्क किया गया उनमें जमैका, आयरलैंड, तुर्की, केन्या, मंगोलिया, इजराइल, फिनलैंड, फ्रांस और कनाडा जैसे 42 देशों से जवाब आ चुका है। ट्राइफेड आदिवासी उत्पादों के पहले सेट को कॉर्नर के लिए भेजने की प्रक्रिया में है।

भारत में स्वदेशी उत्पादों की एक समृद्ध विरासत
भारत में स्वदेशी उत्पादों की एक समृद्ध विरासत है, फिर चाहे वह हस्तशिल्प हो, हथकरघा हो या अन्य उत्पाद हों। राष्ट्रीय नोडल एजेंसी के रूप में TRIFED उन स्वदेशी उत्पादों की मार्केटिंग और उन्हें बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रही है, जिनका उत्पादन देश भर के आदिवासी समूह सदियों से कर रहे हैं। इसी संदर्भ में भौगोलिक संकेत या जीआई टैगिंग ने और भी अधिक महत्व प्राप्त कर लिया है। (NBT)

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