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स्वतंत्रता दिवस : आदिवासियों के हाथ के बने पंखों से मिली राहत

नयी दिल्ली। देश भर के आदिवासी कलाकारों द्वारा हाथ से बनाए रंग-बिरंगे पंखों ने लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में शिरकत करने आए गणमान्य लोगों और अतिथियों को तेज गर्मी से राहत दिलाने का काम किया। तेज गर्मी और उमस के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 75वें स्वाधीनता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करते समय रूमाल से अपना चेहरे से पसीना पोंछते देखा गया।

राष्ट्रीय राजधानी में सुबह करीब साढ़े आठ बजे 30.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। अधिकतम तापमान 37 डिग्री के आस पास बने रहने की संभावना है। जैसे-जैसे सूरज चढ़ रहा था गर्मी भी बढ़ रही थी, ऐसे में कार्यक्रम में शामिल हुए अतिथियों को रूमाल या किसी कपड़े से अपना सिर और चेहरा ढंकते देखा गया और कई लोगों ने गर्मी दूर भगाने के लिए हाथ से बने पंखे का सहारा लिया।

आदिवासियों द्वारा निर्मित उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने वाली और उन्हें बढ़ावा देने वाली नोडल एजेंसी ट्राइफेड ने रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर कार्यक्रम में शामिल होने वाले अतिथियों को हस्तनिर्मित पंखा उपलब्ध कराने का काम किया। मंत्रालय के सहयोग से अतिथियों को पंखा उपलब्ध कराने का यह चौथा साल है।

जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह जनजातीय कारीगरों के शिल्प कौशल को पहचानने और उनकी आजीविका को बढ़ावा देने का एक जरिया है। बयान में कहा गया है कि राजस्थान, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, गुजरात और झारखंड जैसे राज्यों के कारीगरों से प्राप्त ये पंखे पर्यावरण के अनुकूल हैं और इन्हें प्राकृतिक, जैविक सामग्री से बनाया गया है।

एक यादगार के रूप में ये पंखे अतीत की उन यादों को ताजा करने में मदद करते हैं जब ये देश के हर घर का एक अभिन्न हिस्सा हुआ करते थे और गर्मी से राहत प्रदान करते थे।

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