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झारखंड में छात्रवृति को लेकर बवाल: जिम्मेदार कौन?

पिछले कुछ दिनों से झारखंड का सोशल मीडिया दुमका, रामगढ़ व अन्य जिलों से रांची आकर, राजभवन के सामने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे कुछ छात्रों की खबरों से भरा पड़ा है। इनमें से कुछ छात्रों की तबियत खराब होने की सूचना भी मिली है, जो काफी दुखद है।

आइये आज हम लोग यह समझने का प्रयास करते हैं, कि आखिर यह ई-कल्याण छात्रवृत्ति क्या है, और इन छात्रों को सड़क पर लाने का जिम्मेदार कौन है?

ई-कल्याण छात्रवृत्ति के बारे में?
झारखंड ई कल्याण छात्रवृत्ति के माध्यम से राज्य के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़े वर्ग के छात्र-छात्राओं को राज्य सरकार द्वारा स्कॉलरशिप प्रदान की जाती है। यह स्कॉलरशिप राज्य के उन विद्यार्थियों को प्रदान की जाती है, जो अपनी आर्थिक स्थिति के कारण आगे नहीं पढ़ पाते हैं। इस योजना के माध्यम से उन सभी लोगों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसके लिए, सभी लाभार्थियों को झारखंड ई-कल्याण की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होता है।

यह आवेदन कब किया जा सकता है?
सामान्यतः सभी कॉलेजों में एडमिशन जून-अगस्त तक होता है, और उसके तुरंत बाद छात्र इसके लिए आवेदन दे सकते हैं। सामान्यतः जुलाई से लेकर सितम्बर तक ये आवेदन लिए जाते हैं।

इस विवाद का कारण क्या है?
पिछले साल कोरोना की वजह से कई कॉलेजों में एडमिशन की प्रक्रिया फंस गई, तो कई में काफी देर तक ही यह एडमिशन चलता रहा। झारखंड सरकार ने नवम्बर-दिसम्बर में ई-कल्याण पोर्टल खोला गया, जिसमें हजारों-लाखों छात्रों ने आवेदन किया।

पूर्व-निर्धारित समय खत्म होने के बावजूद, कई कॉलेजों में बी.एड. तथा अन्य कोर्सों की काउंसेलिंग व एडमिशन जारी रहा। बाद में, छात्रों के हित में, सरकार ने फरवरी में कुछ दिनों के लिए दोबारा ई-कल्याण पोर्टल खोला, तो हजारों छात्रों ने आवेदन किया। लेकिन अफसोस, कॉलेजों में नामांकन की प्रक्रिया उसके बाद भी जारी रही।

आधिकारिक तौर पर, वित्त वर्ष 20-21 की समाप्ति 31 मार्च 2021 को ही हो गई, लेकिन उसी साल के शैक्षणिक सत्र के लिए एडमिशन की प्रक्रिया उसके बाद भी लगातार जारी रही। आज आंदोलन कर रहे अधिकतर छात्र वही हैं, जिन्होंने 10 फरवरी के बाद नामांकन लिया है।

लेकिन ना तो उन छात्रों ने, और ना ही सरकार ने, किसी विश्वविद्यालय अथवा कॉलेज से यह पूछा कि आखिर 2020-21 के सत्र के लिए एडमिशन 9-10 महीने बाद भी क्यों लिए जा रहे हैं? कोई उनसे यह भी नहीं समझना चाहता है कि एक-डेढ़ सेमेस्टर बीतने के बावजूद, क्यों इनका नामांकन क्यों हो रहा है? और इस देरी की वजह से पढ़ाई का जो नुकसान होगा, उसकी भरपाई कैसे होगी? छात्रवृत्ति को लेकर यह जो समस्या उत्पन्न हुई है, उसके जिम्मेदार वे कॉलेज हैं, जो सत्र शुरू होने के महीनों बाद भी एडमिशन लेते रहे।

तो फिर इसका समाधान क्या है?
झारखंड सरकार ने इस साल यानि 2021-22 के लिए ई-कल्याण पोर्टल खोल दिया है। लेकिन अनाधिकारिक तौर पर राज्य सरकार के कुछ अधिकारी बताते हैं कि सरकार पिछले शैक्षणिक सत्र के लिए भी पोर्टल को फिर खोलने की सम्भावना तलाश रही है। हालांकि यह हो पायेगा अथवा नहीं, यह वक्त ही बतायेगा।

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